Friday, May 7th, 2021

संविधान निर्माता के रूप में डॉक्टर अंबेडकर का अमूल्य योगदान

महू
विषय विशेषज्ञ के रूप में बोलते हुए भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय महू के पूर्व कुलपति प्रोफ़ेसर   चंद्रधर नायक ने भी अपने विचार व्यक्त किए| कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रोफेसर आरजे राव ने कहा कि संविधान निर्माता के रूप में डॉक्टर अंबेडकर का अमूल्य योगदान भारतीय इतिहास में अविस्मरणीय है|

भारतीय समाज में हमें उनके योगदान को समझना होगा तथा उसके अनुरूप आचरण करके मुझे अपने दायित्वों का निर्वहन करना चाहिए| इस अवसर पर बोलते हुए विषय विशेषज्ञ के रूप में बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एसके खटीक ने कहा कि बाबा भीमराव अंबेडकर हमेशा से ही क्रांतिकारी परिवर्तन के प्रबल समर्थक तथा दलितों के हितों के निर्भय की योद्धा के रूप में कार्य करते रहें| उन्होंने सामाजिक असमानता को दूर करने के लिए हमेशा से प्रयास किया|

प्रोफेसर केएन त्रिपाठी ने कहा कि बाबा भीमराव अंबेडकर समतामूलक समाज के पक्षधर थे राष्ट्रीय अखंडता शिक्षा आर्थिक विकास आधुनिक विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी एवं संवैधानिक उद्देश्य के माध्यम से राष्ट्रीय एकता में उन्होंने अपना उल्लेखनीय योगदान दिया| आभार व्यक्त करते हुए बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ एच एस त्रिपाठी ने कहा कि आमतौर पर हम जब बाबा साहब भीमराव अंबेडकर की चर्चा करते हैं तो उन्हें हम संविधान निर्माता के रूप में देखते हैं लेकिन मेरा मानना है कि बाबा साहब को विख्यात विद्वान विशिष्ट शिक्षा विद प्रभावशाली एवं निर्भीक वक्ता आदर्श शिक्षक एक संस्था के रूप में परिभाषित किया जा सकता है सही मायने में वह भारत के राष्ट्र निर्माण के अग्रणी योद्धा थे| कार्यक्रम का संचालन बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र के डॉक्टर शशांक शेखर ठाकुर ने किया| इस अवसर पर विश्वविद्यालय के प्रोफेसर केवी पंडा, प्रोफेसर रुचि घोष डॉ विपिन व्यास डॉक्टर अभिलाषा भावसार डॉक्टर अंशु जा तिवारी डॉ कपिल सोनी समेत समस्त विभागों की शिक्षक विद्यार्थी रिसर्च स्कॉलर एवं समाज के गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे|

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