Friday, May 7th, 2021

सूबे के सभी विश्वविद्यालय चार साल में देंगे रिसर्च की डिग्री

चालीस फीसदी से ज्यादा बदल जाएगा यूजी का कोर्स
भोपाल
देश की नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत उच्च शिक्षा विभाग ने कार्य करना शुरू कर दिया है। 79 बोर्ड आफ स्टडी ने शनिवार को अपनी बैठक कर ली है। अब वे कोर्स को डिजाईन करना शुरू करेंगे, जो सत्र 2021-22 शुरू होने के पहले तैयार हो जाएगा। इसके तहत तीन साल की यूजी डिग्री पूरी करने के बाद विद्यार्थी एक साल शोधकार्य में देता है, तो उसे विश्वविद्यालय चार साल में रिसर्च की डिग्री देगा।

उच्च शिक्षा विभाग ने नई शिक्षा नीति पर कार्य करना शुरू कर दिया है। इसके तहत गत सप्ताह 21 बोर्ड आफ स्टडी, शुक्रवार को 28 और शनिवार को 30 बोर्ड आफ स्टडी की बैठक आयोजित हो चुकी हैं। अब सभी बोर्ड कोर्स को डिजाईन करना शुरू करेंगे। हर बोर्ड कोर्स डिजाईन करने करीब छह से दस बैठकें करेगा। इससे वर्तमान में चल रहे कोर्स का करीब चालीस फीसदी से ज्यादा सिलेबस परिवर्तित हो जाएगा।

मतलब आगामी सत्र में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों को यूजी में सिलेबस में काफी कुछ नया मिलेगा। सभी बोर्ड आगामी सत्र 2021-22 की प्रवेश प्रक्रिश शुरू होने के पहले सभी कोर्स का सिलेबस तैयार कर लेंगे। विद्यार्थी एक साल में पढाई छोडता है, तो उसे सर्टिफिकेट दिया जाएगा। जबकि दो साल की पढाई करने पर डिप्लोमा तक दिया जाएगा। तीन साल में यूजी डिग्री करने के बाद वह पीजी में प्रवेश नहीं लेना चाहता है और एक साल रिसर्चवर्क करना चाहता है, तो विवि उसके रिसर्च को देखते हुए चार साल की रिसर्च की डिग्री देगा।

विभाग द्वारा सभी बोर्ड को निर्देशित किया गया है कि वे कोर्स को ऐसे डिजाईन करें कि विद्यार्थी सर्टिफिकेट, डिप्लोमा और डिग्री लेने के बाद विद्यार्थी उसका उपयोग अपने निजी रोजगार स्थापित करने या नौकरी हासिल करने में कर सके। इसके लिए बोर्ड सभी कोर्स को स्थानीय उद्योगों के आधार पर तैयार करेंगे। यहां तक उन्हें आउट कम वेस्ड कोर्स तैयार करने के लिए कहा गया है।

तीन साल में लागू होगी स्कीम
विभाग यूजी के प्रथम, द्वितीय और तीसरे वर्ष का सिलेबस तैयार कर रहा है। यहां तक चतुर्थ वर्ष के लिए रिसर्च का कोर्स भी तैयार कराएगा। आगामी सत्र 2021-22 में प्रथम वर्ष के प्रवेशित विद्यार्थियों को नया कोर्स पढने मिलेगा। प्रथम वर्ष उत्तीर्ण होने पर उन्हें दूसरे वर्ष और तीसरे वर्ष में नये कोर्स मिलते चले जाएंगे। वहीं चतुर्थ वर्ष में उन्हें अपने विषय से जुडे रिसर्च का कोर्स अध्ययन करने मिलेगा।

पीजी में कोई तैयारी नहीं
विभाग सिर्फ अभी यूजी का सिलेबस ही नई राष्टÑीय शिक्षा नीति के तहत तैयार कर रहा है। पीजी के लेकर विभाग ने कोई तैयारी नहीं की है। इससे वर्तमान में यूजी की डिग्री करने वाले विद्यार्थियों को नई नीति के तहत कैसे कोर्स का अध्ययन कराना चाहिए। इसके लिए विचार विमर्श चल रहा है। हालांकि पीजी में यूजी के 25 फीसदी ही प्रवेश लेते हैं। इसलिए विभाग यूजी के कोर्स तैयार होने के बाद पीजी कोर्स को डिजाईन करने के संबंध में निर्णय लेगा।

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